Fiber-Rich Foods: भारतीय डाइट में फाइबर कैसे बढ़ाएं?

On: August 14, 2026 9:11 PM
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Fiber Rich Foods: भारतीय डाइट में फाइबर कैसे बढ़ाएं?

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एक ऐसा पोषक तत्व जिसे हम भूल ही गए

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पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया खोलो तो हर तरफ प्रोटीन की ही बातें चलती हैं प्रोटीन शेक, हाई-प्रोटीन डाइट, प्रोटीन बार, कितना प्रोटीन खा रहे हो तुम आजकल? जैसे सवाल। और सच कहूं तो प्रोटीन जरूरी है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन इस पूरी होड़ में एक चीज़ पूरी तरह पीछे छूट गई फाइबर।

मुझे याद है जब मैंने पहली बार अपनी डाइट को ध्यान से लिखकर देखा था, तो पता चला कि मेरी थाली में प्रोटीन तो ठीक-ठाक था, लेकिन फाइबर लगभग नदारद था। और यह सिर्फ मेरी कहानी नहीं है यह लगभग हर दूसरे भारतीय की कहानी है।

सच तो यह है कि फाइबर, प्रोटीन से कम अहम नहीं है। बल्कि कई मायनों में यह उससे भी ज्यादा जरूरी है, क्योंकि यही एक चीज़ है जो हमारे पाचन, दिल, ब्लड शुगर और वजन इन सबको एक साथ संभालती है। और फिर भी, यह वह पोषक तत्व है जिसे हम सबसे ज्यादा नजरअंदाज करते हैं।

आंकड़े देखकर मुझे भी हैरानी हुई थी। एक सर्वे बताता है कि करीब 70% भारतीय अपनी रोजाना की फाइबर जरूरत पूरी नहीं कर पाते। इसमें 73% से ज्यादा महिलाएं और 63% से ज्यादा पुरुष शामिल हैं। ज्यादातर लोग रोज सिर्फ 10-15 ग्राम फाइबर लेते हैं, जबकि असल जरूरत 25-38 ग्राम की होती है। यानी हम अपनी जरूरत का लगभग आधा ही पूरा कर पा रहे हैं।

ICMR-NIN भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय पोषण संस्थान की सिफारिश कहती है महिलाओं को कम से कम 25 ग्राम और पुरुषों को 30 ग्राम फाइबर हर दिन चाहिए। यानी, हममें से ज्यादातर लोगों को अपनी फाइबर की मात्रा लगभग दोगुनी करनी होगी। यह सुनने में बड़ा टारगेट लगता है, लेकिन असल में यह उतना मुश्किल नहीं है जितना लगता है बस थोड़ी समझदारी और आदत बदलने की जरूरत है।

इस पोस्ट में मैं विस्तार से बताऊंगा:

  • फाइबर होता क्या है और यह जरूरी क्यों है
  • सॉल्यूबल और इंसॉल्यूबल फाइबर में फर्क, और दोनों के अलग-अलग फायदे
  • फाइबर की कमी से शरीर पर क्या असर पड़ता है
  • भारतीय थाली में फाइबर के सबसे अच्छे स्रोत अनाज से लेकर स्नैक्स तक
  • कितना फाइबर चाहिए और इसे धीरे-धीरे कैसे बढ़ाएं, बिना पेट खराब किए
  • एक दिन का सैंपल मील प्लान, जिसे आप आज से ही फॉलो कर सकते हैं

चलिए शुरू से समझते हैं।

फाइबर क्या है? दो तरह, दो अलग काम

फाइबर असल में एक कार्बोहाइड्रेट है, लेकिन ऐसा जिसे हमारा शरीर पचा नहीं पाता। सुनने में अजीब लगता है जो चीज़ पचती ही नहीं, वह इतनी फायदेमंद कैसे हो सकती है? लेकिन यहीं इसकी खासियत छिपी है। यह पौधों को मजबूती और बनावट देता है, और इसीलिए यह ज्यादातर अनाज, दालों, सब्जियों, फलों, बीजों और नट्स में पाया जाता है। जानवरों से मिलने वाले भोजन जैसे दूध, अंडा, मांस में फाइबर बिल्कुल नहीं होता।

फाइबर मुख्य रूप से दो तरह का होता है सॉल्यूबल (घुलनशील) और इंसॉल्यूबल अघुलनशील। दोनों के काम बिल्कुल अलग हैं, और दोनों ही उतने ही जरूरी हैं। असल में एक हेल्दी डाइट वही है जिसमें दोनों तरह का फाइबर मौजूद हो सिर्फ एक तरह का फाइबर काफी नहीं है।

सॉल्यूबल फाइबर शरीर के अंदर का सफाईकर्मी

सॉल्यूबल फाइबर पानी में घुल जाता है और पेट में जाकर एक जेल जैसा पदार्थ बनाता है। जब आप ओट्स भिगोकर रखते हैं और वह गाढ़ा हो जाता है, तो वही सॉल्यूबल फाइबर का असर है।

कहां मिलेगा: ओट्स, जौ, बीन्स, दालें, मटर, सेब, स्ट्रॉबेरी, नट्स

क्या फायदा है:

  • खराब कोलेस्ट्रॉल LDL को बांधकर शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे दिल की सेहत बेहतर रहती है
  • कार्बोहाइड्रेट के पाचन को धीमा करता है, जिससे ब्लड शुगर एकदम से नहीं बढ़ती बल्कि धीरे-धीरे रिलीज़ होती है डायबिटीज़ के मरीजों के लिए यह बहुत मायने रखता है
  • पेट को भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और अनचाही स्नैकिंग कम होती है
  • गट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है

इंसॉल्यूबल फाइबर आंतों का सफाई तंत्र

यह पानी में नहीं घुलता, बल्कि जस का तस रहता है और मल को बल्क यानी मात्रा देने का काम करता है। इसे आप एक तरह का स्क्रब समझ सकते हैं जो आंतों से होकर गुजरता है और उन्हें साफ रखने में मदद करता है।

कहां मिलेगा: साबुत अनाज, गेहूं की भूसी, सेब का छिलका, गाजर, मक्का, नट्स, बीज

क्या फायदा है:

  • कब्ज़ से बचाता है, क्योंकि यह आंतों में मल को नरम और भारी बनाता है, जिससे वह आसानी से शरीर से बाहर निकल पाता है
  • खाना पचने में लगने वाले समय को नियंत्रित करता है
  • कोलोरेक्टल कैंसर जैसे कुछ खतरों को कम करने में मददगार माना जाता है
  • पेट के अंदर की परत को ठीक रखने में मदद करता है

अब सवाल यह है कि आपको कैसे पता चलेगा कि आप दोनों तरह का फाइबर ले रहे हैं या नहीं? असल में इसका सबसे आसान तरीका है अपनी थाली में रंग-बिरंगी चीज़ें रखना। जितनी वैरायटी होगी, अनाज से लेकर सब्जी और फल तक, उतना ही बैलेंस बना रहेगा।

फाइबर से मिलने वाले फायदे सिर्फ पाचन तक सीमित नहीं

लोग अक्सर सोचते हैं कि फाइबर सिर्फ कब्ज़ ठीक करने के लिए होता है। लेकिन यह धारणा पूरी तरह गलत है। फाइबर का असर शरीर के लगभग हर हिस्से पर पड़ता है। आइए एक-एक करके समझते हैं।

1. पाचन दुरुस्त रहता है

यह सबसे जाना-पहचाना फायदा है, लेकिन इसे समझना जरूरी है। फाइबर आंतों को साफ रखने में मदद करता है। यह मल को नरम बनाता है, जिससे कब्ज़ की नौबत नहीं आती। सॉल्यूबल फाइबर पेट में जेल बनाकर खाने को आराम से आगे बढ़ाता है, जबकि इंसॉल्यूबल फाइबर आंतों की गति को तेज करता है। दोनों मिलकर एक स्मूद पाचन तंत्र बनाते हैं।

2. कोलेस्ट्रॉल कम होता है

सॉल्यूबल फाइबर खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL को बांधकर बाहर निकालने में मदद करता है। जब यह कोलेस्ट्रॉल शरीर से बाहर निकल जाता है, तो नसों में जमाव कम होता है, जिससे दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक का खतरा घटता है। यही वजह है कि डॉक्टर हाई कोलेस्ट्रॉल वाले मरीजों को अक्सर ओट्स और जौ खाने की सलाह देते हैं।

3. ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है

फाइबर शुगर के अब्सॉर्प्शन को धीमा कर देता है, खासकर सॉल्यूबल फाइबर। जब आप कोई हाई-कार्ब चीज़ खाते हैं, तो साथ में अगर फाइबर भी हो, तो ब्लड शुगर एकदम स्पाइक नहीं करती। यह डायबिटीज़ और प्री-डायबिटीज़ वाले लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है, और यही वजह है कि सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस या मिलेट्स की सलाह दी जाती है।

4. वजन कंट्रोल में मदद मिलती है

हाई-फाइबर फूड्स पेट जल्दी भर देते हैं और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देते और इनमें कैलोरी भी कम होती है। सोचिए, एक कटोरी फल खाने में जितना समय और चबाना लगता है, उतना जूस पीने में नहीं लगता और फल आपको ज्यादा देर तक भरा हुआ भी रखता है। कई शोध बताते हैं कि जो लोग ज्यादा फाइबर लेते हैं, उनमें मोटापे, डायबिटीज़ और हार्ट डिजीज़ का खतरा काफी कम होता है।

5. गट हेल्थ और इम्यूनिटी बेहतर होती है

यह वह फायदा है जिसकी चर्चा कम होती है, लेकिन यह उतना ही महत्वपूर्ण है। फाइबर आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है इसे प्रीबायोटिक इफेक्ट कहा जाता है। ये बैक्टीरिया फाइबर को शॉर्ट-चेन फैटी एसिड्स में बदलते हैं, जो आंतों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ाते हैं। आजकल गट हेल्थ को लेकर जितनी बातें हो रही हैं, उनमें फाइबर की भूमिका सबसे केंद्रीय है।

6. मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर

एक कम चर्चित लेकिन दिलचस्प पहलू यह है कि गट और दिमाग का सीधा संबंध होता है, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस” कहा जाता है। जब आपकी आंतें स्वस्थ रहती हैं, तो इसका असर मूड और एनर्जी लेवल पर भी दिखता है। हालांकि इस पर अभी और शोध चल रहा है, लेकिन शुरुआती संकेत उत्साहजनक हैं।

कितना फाइबर चाहिए?

ICMR-NIN की सिफारिश के मुताबिक:

वर्गरोजाना जरूरत
महिलाएं 50 साल तक25 ग्राम
पुरुष 50 साल तक30 ग्राम
50+ महिलाएं22 ग्राम
50+ पुरुष28 ग्राम

उम्र बढ़ने के साथ जरूरत थोड़ी कम हो जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे नजरअंदाज कर दिया जाए — बल्कि बढ़ती उम्र में पाचन और दिल की सेहत के लिए फाइबर और भी जरूरी हो जाता है।

कम फाइबर लेने पर क्या होता है?

अगर आप लगातार कम फाइबर लेते हैं, तो इसके असर धीरे-धीरे दिखने लगते हैं:

  • कब्ज़ सबसे आम और सबसे पहला लक्षण
  • ब्लड शुगर अनियंत्रित रहना जिससे लंबे समय में डायबिटीज़ का खतरा बढ़ता है
  • हाई कोलेस्ट्रॉल और इसके साथ हार्ट डिजीज़ का खतरा
  • वजन बढ़ना क्योंकि बार-बार भूख लगती है और ज्यादा खाया जाता है
  • गट हेल्थ खराब होना जिससे इम्यूनिटी भी कमजोर पड़ती है
  • थकान और सुस्ती क्योंकि पाचन तंत्र सही से काम नहीं कर पाता

क्या ज्यादा फाइबर नुकसान करता है?

हां, अगर आप अचानक बहुत ज्यादा फाइबर लेना शुरू कर दें तो गैस, ब्लोटिंग और पेट में ऐंठन हो सकती है। कई लोग जब फाइबर के फायदे सुनते हैं, तो एक ही दिन में पूरी डाइट बदल देते हैं। यह गलती न करें। शरीर को नई चीज़ों की आदत डालने में समय लगता है। इसलिए इसे धीरे-धीरे बढ़ाएं हफ्ते में करीब 2-3 ग्राम और साथ में पानी भी भरपूर पिएं, क्योंकि फाइबर पानी सोखता है और अगर पानी की कमी हो तो उल्टा कब्ज़ हो सकती है।

भारतीय थाली में फाइबर के बेस्ट सोर्स

अच्छी बात यह है कि हमें फाइबर के लिए कहीं बाहर से महंगे सुपरफूड्स मंगाने की जरूरत नहीं है। हमारी अपनी रसोई में यह पहले से मौजूद है बस हमें सही चीज़ें चुननी हैं।

साबुत अनाज और मिलेट्स

अनाज हमारी थाली का सबसे बड़ा हिस्सा होते हैं, इसलिए यहां किया गया बदलाव सबसे ज्यादा असर दिखाता है।

अनाजखासियतकैसे खाएं
रागीफाइबर से भरपूर, कैल्शियम भी अच्छादलिया, डोसा, रोटी
ज्वारभरपूर फाइबर, ग्लूटेन-फ्रीरोटी, डोसा, खिचड़ी
बाजराभरपूर फाइबर, सर्दियों के लिए बेहतररोटी, सब्जियों के साथ
जौबीटा-ग्लूकन सॉल्यूबल फाइबरखिचड़ी, सूप, सलाद
ब्राउन राइससफेद चावल से 3-4 गुना ज्यादा फाइबरसफेद चावल की जगह
ओट्सभरपूर फाइबर, आसानी से पचने वालानाश्ता, स्मूदी, चीला

अगर आप हमेशा से सफेद चावल खाते आए हैं, तो एकदम से इसे छोड़ना मुश्किल हो सकता है। इसकी बजाय धीरे-धीरे फॉक्सटेल मिलेट, ज्वार या अनपॉलिश्ड लाल चावल आज़माइए शुरुआत में इसे सफेद चावल के साथ मिलाकर भी खा सकते हैं। मैदा की जगह मल्टीग्रेन आटा या सत्तू मिला आटा भी एक अच्छा और आसान स्वैप है।

दालें और फलियाँ

भारतीय डाइट का असली आधार दालें ही हैं, और ये फाइबर और प्रोटीन का बेहतरीन कॉम्बो हैं। राजमा, चना, मूंग दाल, मसूर दाल, तूर दाल और उड़द दाल ये सब स्वादिष्ट भी हैं और शरीर को जरूरी पोषण भी देते हैं।

एक छोटी सी बात जो अक्सर लोग नहीं जानते साबुत दाल जैसे साबुत मूंग या साबुत मसूर में स्प्लिट दाल के मुकाबले ज्यादा फाइबर होता है, क्योंकि स्प्लिट करने के प्रोसेस में कुछ फाइबर वाला हिस्सा निकल जाता है। स्प्राउट्स बनाना इसका सबसे अच्छा तरीका है इससे न सिर्फ फाइबर बढ़ता है, बल्कि पोषक तत्वों का अब्सॉर्प्शन भी बेहतर होता है।

सब्जियाँ

सब्जियां इंसॉल्यूबल फाइबर का सबसे भरोसेमंद स्रोत हैं। भिंडी में सॉल्यूबल फाइबर होता है जो शुगर अब्सॉर्प्शन को धीमा करता है। करेला फाइबर के साथ-साथ ब्लड शुगर कम करने वाले तत्वों के लिए भी जाना जाता है। पालक फाइबर, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है, जबकि मेथी की पत्तियां फाइबर और आयरन दोनों देती हैं डायबिटीज़ वालों के लिए यह खास फायदेमंद मानी जाती है। गाजर को कच्चा खाना सबसे फायदेमंद रहता है, और लौकी हाई-वॉटर कंटेंट के साथ-साथ फाइबर भी देती है, वो भी बहुत कम कैलोरी में। मोरिंगा यानी सहजन की फली भी फाइबर से भरपूर होती है, और सांभर या स्टर-फ्राई में आसानी से शामिल की जा सकती है।

एक आसान टिप जहां तक संभव हो, सब्जियों को छिलके सहित खाएं। छिलके में सबसे ज्यादा फाइबर छिपा होता है, और छीलकर फेंकने में हम अनजाने में सबसे पौष्टिक हिस्सा गंवा देते हैं।

फल

फल

फलों में अमरूद सबसे आगे है एक मीडियम अमरूद में 5 ग्राम से ज्यादा फाइबर मिलता है, साथ में विटामिन C भी भरपूर। पपीता सॉल्यूबल फाइबर के साथ-साथ पापेन एंजाइम भी देता है जो पाचन में मदद करता है। अनार इंसॉल्यूबल फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत है, जो गट और दिल दोनों के लिए फायदेमंद है। जामुन में फाइबर के साथ जाम्बोलिन नाम का तत्व होता है, जो ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करता है इसलिए डायबिटीज़ वालों के लिए यह एक बेहतरीन फल माना जाता है। आमला फाइबर के साथ-साथ क्रोमियम भी देता है, जो कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज्म में मदद करता है। सेब और नाशपाती में पेक्टिन नाम का सॉल्युबल फाइबर होता है बस इन्हें छिलके सहित ही खाएं।

एक बात जो हमेशा ध्यान रखनी चाहिए फलों का जूस पीने में फाइबर लगभग खत्म हो जाता है, क्योंकि जूस बनाते वक्त पल्प गूदा अलग हो जाता है, जिसमें ज्यादातर फाइबर होता है। इसलिए जब भी मौका मिले, जूस की जगह पूरा फल खाना ही समझदारी है।

बीज और नट्स

छोटे दिखने वाले बीज असल में फाइबर के पावरहाउस होते हैं। चिया सीड्स को पानी में भिगोकर स्मूदी या दही में मिलाया जा सकता है। अलसी यानी फ्लैक्ससीड्स में सॉल्यूबल फाइबर के साथ ओमेगा-3 भी होता है इसे सलाद, स्मूदी या पराठे के आटे में मिलाया जा सकता है। मेथी दाना रातभर भिगोकर सुबह खाने से गैलेक्टोमैनन नाम का फाइबर मिलता है, जो शुगर कंट्रोल में मददगार माना जाता है। बादाम भिगोकर या यूं ही खाए जा सकते हैं, और सूरजमुखी के बीज सलाद या स्नैक्स में डाले जा सकते हैं।

देसी स्नैक्स

अच्छी बात यह है कि हमारे पारंपरिक स्नैक्स भी फाइबर से भरपूर हैं, बस उन्हें सही तरीके से चुनना है। भुना चना हाई-फाइबर और लो-कैलोरी दोनों है। मखाना हल्का भूनकर मसाला डालकर खाया जा सकता है। पोहा सब्जियों के साथ बनाया जाए तो एक बैलेंस्ड फाइबर मील बन जाता है। स्प्राउट्स चाहे मूंग हों, चना हों या मोठ सबसे न्यूट्रिएंट-डेंस विकल्प हैं। और सत्तू, जो भुने चने से बनता है, ड्रिंक के रूप में या पराठे में भरकर खाया जा सकता है।

फाइबर बढ़ाने के आसान तरीके

अब बात करते हैं कि इन सारी जानकारियों को असल जिंदगी में कैसे लागू करें, बिना पूरी डाइट को उलट-पुलट किए।

1. स्मार्ट स्वैप करें

बड़े बदलाव की जगह छोटे-छोटे स्वैप ज्यादा टिकाऊ साबित होते हैं।

पहलेअब
सफेद चावलब्राउन राइस, ज्वार, बाजरा, फॉक्सटेल मिलेट
मैदामल्टीग्रेन आटा गेहूं+जौ+ओट्स+सत्तू
फलों का जूसपूरा फल
जंक फूडभुना चना, मखाना, स्प्राउट्स

2. हर मील में फाइबर शामिल करें

एक ही बार में पूरे दिन का फाइबर लेने की कोशिश मत करिए इसे पूरे दिन में बांट दें। नाश्ते में ओट्स, रागी दलिया या सब्जी पोहा लें। दोपहर के खाने में रोटी, दाल और सब्जी के साथ एक कटोरी सलाद जरूर शामिल करें। शाम के नाश्ते में भुना चना, मखाना या एक फल लें। रात के खाने में मोटे अनाज से बनी दाल-खिचड़ी या सब्जी-रोटी लें।

3. स्प्राउट्स को आदत बनाएं

स्प्राउटेड मूंग, चना या मोठ सबसे न्यूट्रिएंट-डेंस फाइबर सोर्स माने जाते हैं। इन्हें बनाना भी आसान है बस रातभर भिगोकर सुबह एक साफ कपड़े में बांध दें, कुछ घंटों में अंकुर आ जाते हैं। इसे सलाद, सूप या स्टर-फ्राई में डाला जा सकता है।

4. छिलके सहित खाएं

सेब, अमरूद, नाशपाती, गाजर, खीरा इन सबके छिलके में सबसे ज्यादा फाइबर होता है। बस अच्छी तरह धोकर खाएं ताकि कीटनाशकों की चिंता न रहे।

5. धीरे-धीरे बढ़ाएं, पानी पिएं

यह सबसे जरूरी बात है, जिसे लोग अक्सर भूल जाते हैं। अचानक फाइबर न बढ़ाएं, गैस, ब्लोटिंग और पेट में ऐंठन हो सकती है। हफ्ते में 2-3 ग्राम बढ़ाएं और पानी भरपूर पिएं। फाइबर पानी सोखता है, इसलिए अगर पानी कम पिया जाए तो फाइबर बढ़ाने का उल्टा असर हो सकता है और कब्ज़ और बढ़ सकती है।

एक दिन का सैंपल फाइबर-रिच मील प्लान

अगर आपको समझ नहीं आ रहा कि शुरुआत कहां से और कैसे करें, तो यह एक आसान उदाहरण है जिसे आप अपने हिसाब से बदल सकते हैं:

  • सुबह उठकर: एक गिलास पानी के साथ भीगे हुए बादाम या अखरोट
  • नाश्ता: रागी दलिया या वेजिटेबल दलिया, साथ में एक फल
  • मिड-मॉर्निंग: भुना चना या मखाना की मुट्ठी भर मात्रा
  • दोपहर का खाना: बाजरे या ज्वार की रोटी, दाल, हरी सब्जी, और खीरे-गाजर का सलाद
  • शाम का नाश्ता: स्प्राउट्स चाट या एक कटोरी फल
  • रात का खाना: मूंग दाल खिचड़ी (मोटे अनाज के साथ) या रोटी-सब्जी

यह प्लान कोई सख्त नियम नहीं है, बल्कि सिर्फ एक दिशा दिखाने के लिए है। असली मकसद यह है कि हर मील में कोई न कोई फाइबर-रिच चीज़ जरूर हो।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रोजाना कितना फाइबर चाहिए? महिलाओं को 25 ग्राम और पुरुषों को 30 ग्राम फाइबर रोजाना चाहिए, ICMR-NIN की सिफारिश के मुताबिक।

सबसे ज्यादा फाइबर किसमें होता है? अमरूद में एक मीडियम अमरूद में 5 ग्राम से ज्यादा फाइबर होता है। इसके अलावा दालें, साबुत अनाज और स्प्राउट्स भी बहुत अच्छे स्रोत हैं।

क्या फाइबर सप्लीमेंट्स लिए जा सकते हैं? हां, लेकिन पहले नेचुरल फूड्स से फाइबर लेने की कोशिश करें, क्योंकि सप्लीमेंट्स में वे बाकी विटामिन-मिनरल्स नहीं होते जो असली भोजन में होते हैं। सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

क्या ज्यादा फाइबर से गैस बनती है? हां, अगर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ा दें। धीरे-धीरे बढ़ाएं और पानी भरपूर पिएं इससे गैस और ब्लोटिंग की समस्या काफी कम हो जाती है।

फाइबर कब खाना चाहिए सुबह या रात? इसका कोई एक सही समय नहीं है, बेहतर यही है कि हर मील में थोड़ा-थोड़ा फाइबर शामिल किया जाए। नाश्ते में ओट्स या रागी, दोपहर में दाल-सब्जी-रोटी, शाम में फल या स्प्राउट्स, और रात में हल्की खिचड़ी या सब्जी इस तरह पूरे दिन में बांटकर लेना सबसे फायदेमंद रहता है।

क्या बच्चों को भी उतना ही फाइबर चाहिए जितना बड़ों को? नहीं, बच्चों की जरूरत उम्र के हिसाब से कम होती है। लेकिन उनकी डाइट में भी साबुत अनाज, फल और सब्जियां शुरू से शामिल करना उन्हें आगे चलकर हेल्दी खाने की आदत डालने में मदद करता है।

आखिरी बात

फाइबर शायद सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया गया पोषक तत्व है, जबकि यह सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। 70% भारतीय इसकी कमी से जूझ रहे हैं लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि इसका हल बहुत आसान और सस्ता है, क्योंकि इसके लिए हमें कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं।

हमारी भारतीय थाली पहले से ही फाइबर से भरपूर है, बस कुछ छोटे-छोटे बदलाव करने हैं सफेद चावल की जगह मिलेट्स और ब्राउन राइस, मैदा की जगह मल्टीग्रेन आटा, जूस की जगह पूरा फल, और जंक फूड की जगह भुना चना, मखाना या स्प्राउट्स।

याद रखिए, महिलाओं को 25 ग्राम और पुरुषों को 30 ग्राम फाइबर रोज चाहिए। सॉल्यूबल, जो शुगर और कोलेस्ट्रॉल संभालता है, और इंसॉल्यूबल, जो कब्ज़ से बचाता है, दोनों ही जरूरी हैं। और सबसे अहम बात, इसे धीरे-धीरे बढ़ाएं और खूब पानी पिएं।

फाइबर सिर्फ कब्ज़ के लिए नहीं है; यह दिल, डायबिटीज़, वजन और गट हेल्थ सबको संभालता है। और सबसे राहत की बात यह है कि इसके बेस्ट सोर्स हमारी अपनी रसोई में पहले से मौजूद हैं बस हमें इन्हें पहचानना और अपनाना है।

Satyam Kumar

मेरा नाम सत्यम कुमार है। मेरी उम्र 22 वर्ष है और मैं AdverseHub.com का संस्थापक हूँ। मुझे बचपन से ही नई-नई चीज़ें सीखने और लोगों के साथ सही जानकारी साझा करने में रुचि रही है। समय के साथ मुझे एहसास हुआ कि इंटरनेट पर स्वास्थ्य से जुड़ी बहुत-सी जानकारी उपलब्ध है, लेकिन हर जानकारी भरोसेमंद नहीं होती। इसी वजह से मैंने AdverseHub.com की शुरुआत की। यहाँ मेरा प्रयास है कि हर लेख आसान हिंदी में, पूरी ईमानदारी और सही जानकारी के साथ लिखा जाए, ताकि पाठकों को ऐसी जानकारी मिले जो उनके रोज़मर्रा के जीवन में सचमुच काम आए।

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